ग़ज़ल - 1
1222 1222 1222 1222
हमारा नाम भी इस देश में थोड़ा बना होता
अगर ख़ुद मैं न अपनी राह का रोड़ा बना होता
तुम्हारी एक गलती ने दुखों से भर दिया जीवन
अगर तुम घाव ना देते नहीं फोड़ा बना होता
अगर सबकी मुरादों को ख़ुदा ने सुन लिया होता
फिर अब तक हर कुंवारे का नया जोड़ा बना होता
गधा घोड़ा नहीं बनता कभी साबुन लगाने से
अगर बनता तो अब तक हर गधा घोड़ा बना होता
संभाला देव ख़ुद को खूब इन बहकी हवाओं में
नहीं तो कातिलों के हाथ का कोड़ा बना होता।।
शुक्रिया आदेश जी❣️🙏
ReplyDeleteNice line sir ji
ReplyDeleteNice brother
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