गीत -2 तुम्हारी रियासत में किया हो रहा है
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तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है?
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है घायल जमीं आसमां रो रहा है
तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है
है कानून अंधा या पैसा बड़ा है
जज की भी आंखों पे पर्दा पड़ा है
यहां बेगुनाहों से जेलें भरी हैं
क़ातिल शुकूँ से रिहा हो रहा है
तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है
वर्षों की मेहनत, पसीना बहाया
पाई-पाई करके पैसा कमाया
मुश्किल से दौलत पिता ने कमाई
कि नाक़ाम बेटा उसे खो रहा है
तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है
गरीबों की दौलत राजा हड़पता
अम्मा की गोदी में बेटा तड़पता
लाशों की ख़ातिर कफ़न भी नही है
प्रभू बेख़बर या ख़ुदा सो रहा है
तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है
गयी नौकरी जल चुके हैं पकौड़े
किस्मत पे पड़ते निस-दिन हथौड़े
कि नौकरी के लाले पड़े है
बेक़ाम बैठा युवा रो रहा है
तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है
दिया था भरोसा बदलाव होगा
किसको पता था अलगाव होगा
उम्मीद सबकी मरने लगी है
कि अब 'देव' तो आसरा खो रहा है
तुम्हारी रियासत में क्या हो रहा है
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देवेन्द्र यादव 'देव'.......✍️
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