ग़ज़ल - 9
2122 2122 2122
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वक़्त है ये करवटें लेता रहेगा
घाव देकर खुद दवा देता रहेगा
जलधि में तूफान भी आते रहेंगे
वीर मांझी नाव को खेता रहेगा
कोयलें उसकी नहीं होंगी कभी भी
काग फिर भी कोयलें सेता रहेगा
दुष्ट क़ातिल कुंद खंजर के सहारे
पत्थरों पर धार को टेंता रहेगा
शख्शियत उसने फ़कीरों सी बना ली
गालियां खा के दुआ देता रहेगा।।
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देवेन्द्र यादव 'देव'.....✍️
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