ग़ज़ल 21
तेरे रोने से कुछ नहीं होगा
चैन खोने से कुछ नहीं होगा
मैल का ढ़ेर छिपा है दिल में
दाग धोने से कुछ नहीं होगा
अब जरूरत है काले जादू की
सिर्फ टोने से कुछ नहीं होगा
बन के बेशर्म मिल ज़माने से
लाज़ ढ़ोने से कुछ नहीं होगा
जहाँ माली ही मसल दे कलियां
फूल बोने से कुछ नहीं होगा
बना है भीड़ का हिस्सा तूं भी
तेरे होने से कुछ नहीं होगा
दर्द जब साथ रहे ख्वाबों में
'देव' सोने से कुछ नहीं होगा।।
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