ग़ज़ल 23

आइए   तुम   भी   तमाशा   देखिए
बात    से    बनते    बतासा   देखिए

आमजन  आदर्श  जिनको  मानता
महफ़िलों  में  उनकी  भाषा देखिए

मर   रहा   है   आदमी बिन कौर के
मिल   रही  झूठी   दिलाशा  देखिए

धीरे-धीरे   छट   रहीं  थीं   बदलियां
बढ़  चला  फिर  से  कुहासा  देखिए

धन  कुबेरों  पर  न  आई आंच कोई
विप्र   का   होता   खुलासा    देखिए

आस अच्छे दिन की धूमिल हो गयी
बढ़  चली   फिर   से  हतासा  देखिए

गैस   नाले   से    यहां    बनने    लगी
स्वप्न   में   इसरो  ओ  नासा    देखिए।।
#Devendra_Dev

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