गीत 8

#बातें_नई_पुरानी_लिख

बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख
कलकल करती नदिया लिख दे
ठंडी हवा सुहानी लिख
बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख

डाली-डाली बना ठिकाना
मधुर तान में छेड़ तराना
करती सबको रोज दिवाना
गीतों की महारानी लिख
वो कोयल मस्तानी लिख
बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख

दिनभर पीछे दौड़ लगाती
लालच देकर हमें बुलाती
थपकी देकर हमें सुलाती
किस्सा कहती नानी लिख
उसकी आंख का पानी लिख
बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख

बात बात पर बात बनाना
रोज रोज का नया बहाना
गलती करके हाथ न आना
बचपन की शैतानी लिख
मम्मी की हैरानी लिख
बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख

बड़े हुए तो कपट कर लिया
मन के अंदर द्वेष भर लिया
बचपन वाला प्यार चर लिया
अब अपनी बेईमानी लिख
उलझी हुई जवानी लिख
बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख

ममता खोकर माया पायी
माता खोकर आया पायी
पेड़ काटकर छाया पायी
अपनी ये नादानी लिख
आंख का मरता पानी लिख
बातें नई पुरानी लिख
भूली हुई कहानी लिख
#DevendraDev

Comments