ग़ज़ल 31 अज़ब-गज़ब

_________________________________________

सर्कस  अज़ब-गज़ब  है  मदारी  अज़ब-गज़ब
हर   शख़्स   पे  चढ़ी  है  ख़ुमारी  अज़ब-गज़ब

जब   से   हक़ीम    लाया    है    नुस्ख़े   नए-नए
हर   रोज   हो   रही   है   बिमारी   अज़ब-गज़ब

पहुंचेंगे   हम    मुक़ाम    तक   है    राम    भरोसे
चालक   भी   अनाड़ी  है  सवारी  अज़ब-गज़ब

ज़र्ज़र   खड़ा   मकान   है   सामान   बिक  गया
होती  नहीं   ये  कम   है   उधारी   अज़ब-गज़ब

कंगाल  करके  हमको  दिख  रहा है खुश बहुत
बन  ठन  के  घूमता  है  भिखारी  अज़ब-गज़ब

मंदिर  के  चढ़ावे को  भी  कर  जाता  है  हज़म
भगवान का  मालिक  है  पुजारी अज़ब-गज़ब

कांटा  ही  निकलता  है  जिसे  सींचते  हो   तुम
क़िस्मत  है  देव   कैसी   तुम्हारी  अज़ब-गज़ब।।
_____________________________________

Comments