ग़ज़ल - 40
लोग अपनी आदतों से जो बहुत रंगीन होंगे
वो लिबासों को बदलने के बहुत शौक़ीन होंगे
फ़न है जिनके पास नफ़रत की फसल को सींचने का
आदमी होकर भी ऐसे लोग बस कोकीन होंगे
आदमी बिन बात के जो चिढ़ रहे हैं दूसरों से
देखना तुम उनके मुखड़े बेवजह ग़मगीन होंगे
रोटियां कुछ की नहीं पचतीं बिना चुगली भिड़ाये
आग भड़काने को हाज़िर हर जगह दो-तीन होंगे
गर कभी तुमने किसी बेआसरा का हाथ थामा
जेल में जाना पड़ेगा जुर्म सब संगीन होंगे
चोरियों का डर जिन्हें हर पल सताता ही रहेगा
वो बहुत विद्वान होकर भी मियां चिरक़ीन होंगे
जिस घड़ी तक सीख पायेगा मुआं कानून सारे
देव उस आती घड़ी तक सब नए आईन होंगे।
कोकीन- नशीला पदार्थ
मियां चिरक़ीन- एक ग़ज़लकार जिन्होंने अपनी ग़ज़लों की चोरी होने के डर से, अपनी ग़ज़लों का विषय पाखना (लेट्रिन) बना लिया।
आईन - कानून
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