ग़ज़ल -4
ग़ज़ल
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बह्र-मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन ,
1222 1222 122
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बहुत अच्छा बहाना मिल गया है
तुम्हें दूजा ठिकाना मिल गया है
बड़े खुश दिख रहे हो कुछ दिनों से
बलम तुमको पुराना मिल गया है
भुला कर के सभी कसमें वफ़ा की
सनम जीवन तुम्हारा खिल गया है
ज़ख़म तुमने दिया इतना गहरा
हमारा दिल तलक अब छिल गया है
तड़प कर हम सिलेंगे चाक दिल के
तुम्हारा लाल जोड़ा सिल गया है
रहो खुश ज़िन्दगी भर ये दुआ है
तुम्हारा प्यार तुमको मिल गया है।।
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देवेन्द्र यादव 'देव'.........✍️
बेशक! शानदार दादा
ReplyDeleteShukriya
Deleteवाह! लाजबाब 👌👌👌❤❤❤💝💝
ReplyDeleteShridya aabhar
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