ग़ज़ल -4

        ग़ज़ल
=====================
 बह्र-मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन ,
1222 1222 122 
_________________________
बहुत अच्छा बहाना मिल गया है
तुम्हें दूजा ठिकाना मिल गया है

बड़े खुश दिख रहे हो कुछ दिनों से
बलम तुमको पुराना मिल गया है

भुला कर के सभी कसमें वफ़ा की
सनम जीवन तुम्हारा खिल गया है

ज़ख़म तुमने दिया इतना गहरा
हमारा दिल तलक अब छिल गया है

तड़प कर हम सिलेंगे चाक दिल के
तुम्हारा लाल जोड़ा सिल गया है

रहो खुश ज़िन्दगी भर ये दुआ है
तुम्हारा प्यार तुमको मिल गया है।।
_____________________________
        देवेन्द्र यादव 'देव'.........✍️

Comments

Post a Comment